रेल का पहिया गुजरता है तो पटरी का खिंचाव बहुत छोटा होता है। इंदौर के राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र ने इस बदलाव को फाइबर में लौटती रोशनी से पढ़ने वाले सेंसर का व्यवहार्यता-परीक्षण किया। सेंसर रेल की खड़ी वेब पर दो स्लीपरों के बीच लगाया गया।
काँच के भीतर प्रकाश की कंघी
फाइबर ब्रैग ग्रेटिंग में काँच के कोर का अपवर्तनांक बराबर अंतर पर बदला जाता है। यह संरचना किसी चुनी हुई तरंगदैर्ध्य को वापस भेजती है। खिंचाव पड़ने पर धारियों का अंतर बदलता है, इसलिए लौटी तरंगदैर्ध्य भी खिसकती है। आरआरकैट ने 255 नैनोमीटर पराबैंगनी प्रकाश और फेज-मास्क से ऐसे ग्रेटिंग बनाने की व्यवस्था विकसित की।
सामान्य ट्रेन के संकेत में हर बोगी के दो पहिया-युग्म नीचे जाती जोड़ियों की तरह दिखे। इसके बाद 22 और 50 मिलीमीटर के कृत्रिम सपाट हिस्सों वाले पहिए रेल से टकराए तो क्रम से बाहर अलग चोटियाँ उभरीं। इंजन के छह पहियों की चोटियाँ डिब्बों से ऊँची थीं, क्योंकि उनका भार अधिक था।
एक ही फाइबर, कई कठिन जगहें
यही मूल तकनीक ताप और विकिरण के कठिन वातावरण में भी बदले रूप में काम करती है। आरआरकैट ने एक फाइबर पर कई ग्रेटिंग, 20-बिंदु ताप-मापन और उच्च विद्युतचुंबकीय शोर वाली जगहों के उपयोग दर्ज किए हैं। रेल परीक्षण साफ करता है कि प्रकाश-संकेत से पहिए की असामान्य चोट कैसे अलग की जा सकती है।
मुख्य बातें
- आरआरकैट 255 नैनोमीटर पराबैंगनी प्रकाश से फाइबर ग्रेटिंग बनाता है।
- सेंसर रेल की वेब पर दो स्लीपरों के बीच लगाया गया।
- कृत्रिम सपाट पहियों ने सामान्य पहियों से अलग चोटियाँ दर्ज कराईं।
स्रोत और संदर्भ
- Raja Ramanna Centre for Advanced Technology · Fibre Sensors & Optical Spectroscopy Section: WILD system ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- RRCAT Newsletter · Development of FBG sensors and validation for field deployment, Vol. 34 Issue 1 (2021) ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



