बांधवगढ़ में गौर की बहाल हुई आबादी को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने 2024–27 की परियोजना शुरू की है। उद्देश्य नए गौर जोड़कर आनुवंशिक विविधता बढ़ाना है। WII की 2025 की कार्ययोजना इस अगले चरण की तैयारी बताती है। छोटे और अलग-थलग समूह में विविधता बनी रहने से भविष्य की आबादी के लिए अधिक मजबूत आधार मिल सकता है।
कान्हा से 50 गौर की वापसी
कान्हा से जनवरी 2011 में 19 और मार्च 2012 में 31 गौर बांधवगढ़ लाए गए। कुल 50 में से 27 को VHF या GPS/सैटेलाइट कॉलर पहनाए गए। लगभग 200 किलोमीटर दूर कान्हा को समान जलवायु, वनस्पति और पर्याप्त बड़े स्रोत-समूह के कारण चुना गया था। मगधी रेंज में 50 हेक्टेयर का बिजली-बाड़ वाला वनखंड, चारा और कृत्रिम जलस्रोत तैयार किए गए। लगभग एक महीने अनुकूलन और झुंड बनने की निगरानी के बाद बाड़ खोली गई। 2015–18 के अगले अध्ययन ने चार पहचाने झुंडों से 1,277 स्थान रिकॉर्ड किए और अक्टूबर–नवंबर 2017 में छह गौर को फिर कॉलर लगाया। उस अध्ययन-काल में 72 गौर का उल्लेख मिलता है। यह ऐतिहासिक संख्या है; इस लेख में 2026 की गणना का दावा नहीं किया गया है।
छोटे समूह में विविधता क्यों जरूरी
WII के अनुसार छोटे समूह में निकट संबंधियों के बीच प्रजनन और आनुवंशिक बहाव से लंबे समय की जीवित रहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। आनुवंशिक बहाव वह बदलाव है जिसमें संयोग से कुछ वंशानुगत विशेषताएँ छोटे समूह में कम या अधिक हो जाती हैं। बाहर से नए जीव जोड़ने को सप्लिमेंटेशन कहा जाता है। 2025 की कार्ययोजना इसी प्रक्रिया से विविधता बढ़ाने की बात करती है। यह नए स्थानांतरण की पूरी हो चुकी संख्या का रिकॉर्ड नहीं है।
बांधवगढ़ के पुराने गौर 1998 तक स्थानीय रूप से समाप्त हो गए थे। उस दौर में नियमित निगरानी न होने के कारण सटीक वजह ज्ञात नहीं है। 2007 के प्रस्ताव के बाद आबादी की व्यवहार्यता पर विश्लेषण हुआ और 2011–12 में वापसी हुई। इस बार कॉलर और झुंडों की लगातार निगरानी ने उनकी आवाजाही का रिकॉर्ड बनाया। नई परियोजना उसी बहाल आबादी के भविष्य पर केंद्रित है।
मुख्य बातें
- बांधवगढ़ का पुराना गौर-समूह 1998 तक स्थानीय रूप से समाप्त हो गया था; सटीक कारण निर्णायक नहीं है।
- जनवरी 2011 में 19 और मार्च 2012 में 31 गौर कान्हा से लाए गए; 27 पर रेडियो कॉलर लगाए गए।
- 2015–18 अध्ययन में संख्या 72 दर्ज थी; यह अध्ययन-काल का आंकड़ा है, आज की गणना नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- Wildlife Institute of India · Monitoring of reintroduced Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Phase II Final Report ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- Wildlife Institute of India · Supplementation of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Madhya Pradesh ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- Wildlife Institute of India / Madhya Pradesh Forest Department · Reintroduction of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Madhya Pradesh ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



